एफएफसी परफॉर्मेंस ग्रांट के भुगतान पर उठे सवाल,मंडलायुक्त से एक करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन की जांच की मांग, सचिव की अंतरिम बहाली पर भी उठे सवाल!
- By UP Samachaar Plus --
- Monday 27 Oct, 2025
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महराजगंज। सिसवा ब्लॉक की ग्राम पंचायत लक्ष्मीपुर एकडंगा में करीब एक करोड़ रुपये के संदिग्ध भुगतान को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों ने मंडलायुक्त गोरखपुर मंडल को प्रेषित शिकायती पत्र में कहा है कि पंचायत सचिव पवन कुमार गुप्ता को एफएफसी परफॉर्मेंस ग्रांट (FFC Performance Grant) में अनियमितताओं के आरोप में जिलाधिकारी द्वारा 10 अक्टूबर 2025 को निलंबित किया गया था, लेकिन महज एक सप्ताह के भीतर डीपीआरओ महाराजगंज ने उन्हें अंतरिम बहाली दे दी। इससे प्रशासनिक हलकों और ग्रामीणों में सवाल उठ रहे हैं कि इतनी त्वरित बहाली आखिर किस दबाव में की गई।
ग्रामीणों — रवि, अभिषेक पटेल, चंदन पटेल, दुर्गेश और अश्वनी ने पत्र में बताया कि पंचायत के अभिलेखों और भुगतान-वाउचर के अनुसार G P Enterprises नामक एक संदिग्ध फर्म को लगभग ₹1 करोड़ का भुगतान दर्शाया गया है। फर्म के नाम पर कागजों में स्टेशनरी, फर्नीचर, निर्माण सामग्री, पेंट, कीटनाशक, पाइप, ईंट, सीमेंट और यहां तक कि JCB ट्रैक्टर से मिट्टी ढुलाई तक की सप्लाई दिखाई गई है, जबकि गांव में न तो दुकान है, न गोदाम और न ही कोई स्टाफ।
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि 05 अक्टूबर 2025 को “देबर टोला पर मिट्टी भराई” शीर्षक के अंतर्गत दो भुगतान किए गए हैं, जबकि यह कार्य स्वीकृत कार्ययोजना में शामिल ही नहीं था। इससे एफएफसी और अन्य मदों की राशि में हेड मिक्सिंग की आशंका और गहराती है।
ग्रामीणों ने फर्म के GST, PAN, बैंक KYC, GSTR फाइलिंग और ई-इनवॉइस की जांच, पंचायत भुगतान से UTR का क्रॉस-वेरिफिकेशन, तथा 2021-22 से 2025-26 तक का विशेष फॉरेंसिक ऑडिट कराने की मांग की है। साथ ही उन्होंने रिकॉर्ड सील-एंड-सीजर, रिकवरी, और प्रधान अमेरिका प्रसाद व सचिव पवन गुप्ता पर विभागीय कार्रवाई की भी मांग की है।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि सचिव की अंतरिम बहाली के बाद रिकॉर्ड में हेराफेरी और गवाहों पर दबाव का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो पंचायत की सार्वजनिक राशि का बड़ा हिस्सा हड़प लिया जाएगा।
आवेदन के साथ ग्रामीणों ने प्रमाण स्वरूप समाचार कटिंग, वाउचर स्टेटमेंट और पूर्व में जिलाधिकारी, सीडीओ व डीपीआरओ को दी गई शिकायतों की प्रतियां भी संलग्न की हैं।
ग्रामीणों ने मंडलायुक्त से 30 दिन के भीतर प्रारंभिक कार्यवाही रिपोर्ट की प्रमाणित प्रति उपलब्ध कराने तथा निष्पक्ष व समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने की मांग की है।

